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एक जीवन

एक ही जीवन है, कितना अनमोल, कितना सुंदर। हर सांस एक नया गीत, हर सुबह एक नई रोशनी। न शिकायतों का बोझ, न अधूरी चाहों की दीवार। बस प्यार, मुस्कान और सपने, यही है जीवन का असली सार। चलो जी लें इस पल को, जैसे यह आख़िरी हो। क्योंकि एक ही जीवन है, और यही सबसे बड़ी रोशनी हो। @सदफ@

नानी माँ

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 नानी माँ आसमां में बन गई है इक तारा। अब भी है वो हमारी आंखों का सितारा।। कहाँ ढूंढू, कहाँ से लाऊं वो हसीन तारा। जो अब नहीं है हमारी ज़मीं का सितारा।। जब भी देखती हूं आसमां का कोई तारा। लगे जैसे वो नानी के मुख वाला सितारा।। बादलों में जब न दिखता वो सांझ का तारा। तब लगता है कहां है वो अनमोल सितारा।। जो था अभी यहीं, कहां गुमशुदा है वो तारा। समझ न आए बादलों में छिपा है वो सितारा।। ये आंख मिचौली करते हैं बादल और तारा। डर के साए में उलझाते, खो जाता वो सितारा।। @सदफ @

सफ़र

आज तुमसे जुदा होने का वक्त आ गया है  इस बात से मन बड़ा ही बोझिल हो रहा है  शायद हम दोनों का इतना ही साथ लिखा है  तुम अपने रास्ते हम अपने रास्ते को रवाना है  हमने तुमको अपनी मेहनत से संवारा हैं  दिन रात एक करके तुमको पूर्ण बनाया है  कुछ कंटीली पतवारों ने राह को रोकना तो चाहा है लेकिन हमारा तुम्हारा सफर बड़ा ही सुहाना रहा है हमारा तुम्हारा सफर कुछ यूं शुरू हुआ है  वर्ष 2018 में मैंने तुमको पास किया है  माह सितंबर दिनांक 24 को तुमसे मिलन हुआ है  और उसी दिन मेरे जन्म का भी दिवस होता है  लेकिन तुम्हें खुद से अलग करना मेरी जरूरत  ये बात मन को कचोट रही है
 यूं ज़िंदगी के ख़्वाब दिखा गया कोई  मुस्कुराके अपना बना गया कोई बहती हुई हवाओं को यूं थाम ले गया कोई सावन में आके कोयल का गीत सुना गया कोई  यूं अपने प्यार की हवा से गम को मिटा गया कोई मीठे सपनों में आके अपना बना गया कोई  धूल लगी किताब के पन्ने पलट गया कोई उसमें सूखे हुए गुलाब की याद दिला गया कोई  यूं ज़िंदगी में फिर से प्यार की बरसात दे गया कोई  बिन आहट के इस दिल में जगह बना गया कोई यूं फिर से मुझे जीने का मकसद सीखा गया कोई बिन आहट अपना बना गया कोई❤️❤️❤️ 💞💞💞💞💞💞💞💞💞 शालिनी मोहतरमा आपके लिए।   आपकी अपनी सदफ💕💗

वो गुज़रा हुआ हर लम्हा शिद्दत से याद आता है

आज वो पहली मुलाकात का किस्सा याद आता है स्कूल में अभिवादन करने का मंजर नज़र  आता है हिंदी की अलख जलाने की आपकी ज़िद का  वो गुज़रा हुआ  हर लम्हा शिद्दत से  याद आता है आप जैसी हिंदी की टीचर का बोलना याद आता है आपके सवालों का उत्तर न देने का मलाल होता है लेकिन आपके हिंदी में समझाने के उन अभिकथनों का  वो गुज़रा हुआ हर लम्हा शिद्दत से याद आता है मेरी ज़िंदगी के रंजोगम में आपका दखल देना याद आता है मां के किरदार को निभाकर आपका समझाना याद आता है आपके अपनेपन के एहसासों की सरगोशी का वो गुज़रा हुआ हर लम्हा शिद्दत से याद आता है आपका वो गले लगाकर हक जताना याद आता है ज़िंदगी की उलझनों के दलदल से निकलना याद आता है लोगों की भीड़ के हमदर्दों में आपकी हमदर्दी का वो गुज़रा हुआ हर लम्हा शिद्दत से याद आता है हिंदी की दुनिया में मुझे भेजने का वो सपना याद आता है मेरे किरदार को बदलने का सारा श्रेय आपको जाता है कांटो की डगर पर आपकी उंगली पकड़ कर चलने का वो गुज़रा हुआ हर लम्हा शिद्दत से याद आता है  ज़िंदगी के मुकाम को पाने में आपका सहयोग याद आता है आपकी हर बात में सच्चाई का आइना नजर...

पी एच डी का दर्द कोई नहीं समझता

 सुबह से शाम हो गई लिखते लिखते  लेकिन कुछ न लिख पाए  हालत ये हो गई है हमारी ज़माने में कि इसका दर्द हम किसी को कह नहीं पाते 

कोई अपना नहीं

 किससे कहें दर्दे फसाना अपना,लोगों की भीड़ में कोई अपना नहीं  वक्त की सितम ज़रीफी देखो, इन अपनों में कोई अपना नहीं  मोजो में रवानी नहीं, साहिल का किनारा नहीं दोस्त तो बहुत हैं लेकिन इन अपनों में कोई अपना नहीं ज़िंदगी बड़ी वीरान सी लगती है, शहर ख़ामोश सा लगता है रात की तारीकियों में उजाले की कोई किरन नहीं सुबह का नूर और पटरी पर दौड़ती ये ज़िंदगी इस ज़िंदगी में लज़्जत और ख्वाहिशात की कोई शय अपनी नहीं इस ज़िंदगी में किसे कहें अपना, कोई अपना नहीं। सदफ